शिव पुराण की कथा: पापी स्त्री चंचुला को शिवलोक की प्राप्ति (अध्याय २-५)

शिव

समुद्र के निकटवर्ती एक गांव था। जिसका नाम वाष्कल था। इस गांव के लोग दुष्ट प्रवृत्ति के मालिक थे। इनका किसी भी धार्मिक कार्य से कोई लेना-देना नहीं था। यह ना तो देवताओं पर विश्वास करते थे और ना ही भाग्य पर। यह लोग खेती करते थे। परंतु साथ में अस्त्र और शास्त्र भी रखते थे। धर्म और न्याय से इनका कुछ लेना-देना नहीं था। वह सदा ही भोगों में डूबे रहते थे। यहां की स्त्रियां भी कुटिल, दुष्ट, नीच विचार वाली थीं। यह एक गांव नहीं दुष्टों का निवास स्थान था।

शिव पुराण कथा सुनने से घोर पापी को शिवलोक की प्राप्ति (अध्याय-1)

शिव पुराण कथा

एक दिन देवराज घूमता-घूमता झूसी-प्रयाग में पहुंच गया। झूसी-प्रयाग को पहले पृष्ठानपुर कहा जाता था। वहां उसने एक शिवालय देखा जिसमें बहुत सारे साधु महात्मा एकत्र हुए थे। देवराज उस शिवालय में चला गया और वहीं पर रहने लगा।